कविता के माध्यम से, समाज का मार्गदर्शन!

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✍️ कुमार गुप्ता

इंतज़ार का शमशान कविता!

 विषय: दिल की कतार में दर्द और वक़्त के  इंतजार में हम 🕰️! 

प्रस्ताव:

"कभी-कभी इश्क़ सिर्फ मोहब्बत नहीं होता — ये वो रोग बन जाता है। जहाँ एक ऐसा रोग जो दिल से शुरू होकर रूह तक फैल जाती है। 


और जब इंतज़ार की उम्र बढ़ती है, तो वो मोहब्बत शमशान की सीढ़ियों तक पहुँच जाती है।

आज मैं आपके सामने एक ऐसी ही कविता लेकर आया हूँ — जिसमें एक प्रेमी का दर्द, उसका पछतावा, और उसका अंतहीन इंतज़ार शब्दों में नहीं, साँसों में बसा है।

कविता का नाम है — 💔 "इंतज़ार का शमशान"

लेखक — यशवंत कुमार गुप्ता"


इंतज़ार की आग में जलता एक दिल — "इश्क़ की आग में जलता रहा, इंतज़ार की राख में बदलता रहा।" एक अधूरी मोहब्बत की दास्तान — कुमार✍️गुप्ता | yashswarg.blogspot.com
💔 “इश्क़ की आग में जलता रहा,
इंतज़ार की राख में बदलता रहा...”

तेरे बिना अब इश्क़ बस एक राख बन गया है,
और मैं — उस शमशान की देहरी पर खड़ा हूँ,
जहाँ मोहब्बत की आखिरी सांस बाकी है। 🕯️💞

✨ एक अधूरी मोहब्बत की दास्तान...
✍️ — कुमार गुप्ता (Yashswarg)



आइए महसूस करें —

इंतज़ार का शमशान जहाँ

🎭 इंतज़ार के कगार पे — एक प्रेम कविता



🎶 वक़्त के कगार पे खड़े थे हम-तुम,

⏳ एक ही मोड़ पर, जहाँ अलग-अलग कदम।


मैं भी एक कतार के, इंतजार में खड़ा था,

 तेरे इंतज़ार में, तेरे इकरार में।

😔 खुद से खुद को, इतना दूर कर लिया,

कि तुझे देखकर खुद को मैं मजबूर कर लिया।


तुझे मालूम नहीं...

तुझे मनाने के लिए , मैं किस हद तक,

कितने मोड़ों पे गया।

🌸 तू ज़रा सी बस मान जाती,

उसमें भी थोड़ी सी मुस्कुरा देती,

छुपाई आहट पे,

ज़रा सी अपने दिल में जगह दे देती...। 

मेरा दिल आज भी तेरी इंतज़ार में था।


🙏 नहीं भूला मैं अपनी उन सारी गलतीयो को,

जिस पर तेरा मान और अभिमान था।

💔 आज तू मुझे छोड़ के

मुह मोड़के जा रही हो। ,

मुझमें खामियाँ दिखाकर,

बीमार कर मुझे आजमा रही हो। 

लगा दिया मुझे हमेशा के लिए ।

🩹 इश्क़ की एक रोग ,

जिससे दिल की कतार में

बढ़ गए कई रोग।


⏳ आज भी इस रोग को, 

मिटाने के लिए,

इंतज़ार के कगार पे मैं खड़ा हूँ।


परवाह नहीं अब बेबसी और लाचारी की


😢 हद हो गई बेवफ़ा,

तू आई ही नहीं...

तेरे प्यार में तड़पता मेरा लाश भी

शमशान जाने के कगार पर है।

 

🕯️ ना जाने तू किस दिन मरेगी,

मेरे शमशान के बाजू वाला कब्र

 तुझे बुलाने के इंतजार में है। 


🌹ऐसा प्यार मिलेगा कहां 

जो मरने के बाद भी 

🕊तेरे इंतजार में है । 

वक्त के कगार पे

 हम तुम, तुम हम

मिलने के इंतजार में है। 🤝


✍️ रचनाकार:

यशवंत कुमार गुप्ता


 "इंतज़ार का शमशान"

इस कविता का उद्देश्य यह है कि:-


हर प्रेम कहानी का अंत "साथ" में नहीं होता।

 कुछ कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं — जहाँ प्रेमी सिर्फ प्रेम करता है, और दूसरा… बस चला जाता है।


"इंतज़ार का शमशान" एक ऐसी ही कहानी है —

 जहाँ प्रेमी अपने प्रेम की राख को सीने से लगाए हर उस मोड़ पर खड़ा रहा, जहाँ कभी उसने साथ चलने की उम्मीद की थी।


यह कविता सिर्फ शब्द नहीं, एक टूटे हुए दिल की

 चीख है, एक ऐसा इंतज़ार जो अब शमशान की देहरी तक पहुँच चुका है।


यह रचना उन सभी दिलों को समर्पित है जो किसी को मनाते-मनाते खुद को खो बैठे, और

 फिर भी आज तक उसी मोड़ पर खड़े हैं — जहाँ से कोई लौटकर नहीं आया।


🎯 कविता का मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार है: -


💔 मेरी कविता एक टूटे हुए प्रेमी की भावनाओं का दस्तावेज़ है — जहाँ इश्क़ सिर्फ मोहब्बत नहीं, एक रोग बन जाता है।


⏳ कविता का मुल मकसद है — उस दर्द को शब्द देना जो अक्सर दिल में दबा रह जाता है।


😢 यह रचना दर्शाती है कि कैसे एकतरफा प्रेम, पछतावा, और इंतज़ार इंसान को भीतर से तोड़ देता है।


🕯️ "इंतज़ार का शमशान" एक प्रतीक है — उस जगह का जहाँ प्रेम की मृत्यु होती है, मगर यादें ज़िंदा रहती हैं।


🌫️ कविता उन सभी लोगों के लिए है जो किसी को मनाने की कोशिश में खुद को खो बैठते हैं, और फिर अकेलेपन की आग में जलते हैं।


🙏 यह रचना पाठकों को भावनात्मक रूप से जोड़ती है, उन्हें अपने भीतर झाँकने का अवसर देती है — और शायद उन्हें यह एहसास भी कराती है कि वे अकेले नहीं हैं।


समापन पंक्तियाँ:

🌹"इश्क़ की आग में जलता रहा, 🔥

इंतज़ार की राख में बदलता रहा।

 🧐वो लौटी नहीं... और मैं शब्दों में 🙏

अपनी अंतिम साँसें ढूँढता रहा।"


🙏 "इंतज़ार का शमशान" सिर्फ एक कविता नहीं, एक अधूरी मोहब्बत की अंतिम पुकार है।

 अगर आपने कभी किसी को टूटकर चाहा है, तो ये कविता शायद आपके दिल की आवाज़ भी बन  सकती है।


✍️ रचनाकार:


 यशवंत कुमार गुप्ता


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📘 An English version of this poem is provided below for better understanding and collaboration.🌍


🕯️ The Cremation of Waiting

— A Tale of Love, Pain & Endless Time


✍️ By Yashwant Kumar Gupta



💔 Prologue: When Love Turns into a Disease


Sometimes love isn’t just affection —

it becomes a disease.


A disease that begins in the heart

and spreads deep into the soul. 💘


And as the age of waiting grows,

that love walks slowly

toward the steps of its own cremation ground. 🕯️


Tonight, I bring you one such story —

where a lover’s pain, regret,

and endless waiting breathe together

not in words,

but in every sigh. 🌫️



🎭 The Poem — “Cremation of Waiting”


⏳ We stood at the edge of time —

you and I —

at the same turn,

but on different paths.


I too stood in line,

waiting for you...

for your confession, for your return. 💔


I drifted so far from myself

that even seeing you

made me weak within. 😔


You never knew —

how many turns I took,

how many nights I walked

just to make you smile again. 🌸


If only…

you had smiled a little,

forgiven a little,

opened your heart just once —

my heart would still be alive

waiting for your knock. 💞


🙏 I haven’t forgotten my mistakes —

the ones that broke your pride.

But today you turn away,

leaving me behind…


You showed me my flaws,

tested my heart,

and turned my love

into a lifelong disease. 🩹


Now my heart is full of waiting,

infected by the sickness of love —

each moment heavier than time. ⏳



😢 You never came back, my love…

My dying body

waits for you at the edge of the pyre —

half-alive, half-ash. 🔥


🕯️ I wonder,

the day you die —

will the grave beside mine

finally call your name?


🌹 Because this love...

it won’t end even after death.

My ashes still wait for you,

somewhere between earth and eternity. 🕊️



🤝 Time stands still —

you and I,

I and you —

still waiting to meet,

on the edge of forever. ⏳


Kumar✍️ Gupta



🎯 Meaning Behind “Cremation of Waiting”


💔 Every love story doesn’t end with togetherness.

Some die quietly —

where one keeps loving,

and the other… simply leaves.


This poem is that silence —

where the lover still stands

with the ashes of his own love,

clutched to his chest.


“Cremation of Waiting” is not just poetry —

it’s the scream of a heart

that loved beyond its last breath. 💞


It’s for those who lost themselves

while trying to hold someone close,

and still wait… at the same old turn

where no one ever returned. 🌫️



🌹 Closing Lines


I kept burning in the fire of love, 🔥

turned into ashes of waiting...

She never came back — and I...

kept searching for my last breath within words. 🙏


💔 “The Cremation of Waiting” isn’t just a poem —

it’s the final cry of an unfinished love.


If you’ve ever loved someone till it hurt,

this poem might just be the echo

of your own heart. 💞


✍️ — Yashwant Kumar Gupta


#TheCremationOfWaiting

 #HeartfeltPoem 

#UnfinishedLove 

#SoulfulWords 

#Yashswarg 

#KumarGuptaPoetry 

#LoveAndLoss

 #EndlessWaiting 🕯️💔



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