विषय: एक दिन की मुलाकात, साल भर की तड़प!
👤 परिचय: यशवन्त कुमार गुप्ता 🖋️ कविता मेरी आत्मा है, मेरे शब्द हथियार हैं 💔 इश्क की गहराई में डूबा एक रचनाकार, जो दर्द को भी सुंदरता में बदल देता है !
📍 स्थान: भारत 🇮🇳 📚 रुचि: शायरी ✨, भावनात्मक लेखन 📝, आत्मचिंतन 🤔 🪦 कब्र से भी पुकारता हूँ, ताकि दुनिया मेरी खामोशी को सुन सके 🎭।
हर कविता में एक कहानी है — मेरी, तुम्हारी, और उस दर्द की जो सबने महसूस किया है!
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| 🌹 “इश्क़ में मिट जाने की दास्तान!” एक रूह की तड़प, एक दिल की सदा — इश्क़ में मिटा हूँ, इश्क़ की मिट्टी में दबा हूँ... 💔✨ 👉 और रोमांटिक कविताएं पढ़ें: yashswarg.blogspot.com |
आइए महसूस करें —
एक दिन की मुलाकात, साल भर की तड़प!
तू जो मुझसे रूठे तो मनाऊं कैसे 💔
जो दर्द तुमको दिया है,
उस दर्द को भी अपनाऊं कैसे 😔
तुम जो कहती हो मुझे दर्द नहीं है,
उस दर्द को भी मैं दिखाऊं कैसे 😢
तुझे मनाए बिना
मैं शमशान जाऊं तो जाऊं कैसे ⚰️
मैं कब्रिस्तान में भी जाकर
तुझको अपने कब्र पर बुलाऊं तो
रुलाऊं कैसे 🪦
इश्क में लुटा हूं 💘 इश्क में मरा हूं 💀
इश्क में मिटा हूं 🫥 इश्क की मिट्टी में दबा हूं 🕳️
तू दुनिया की उलझन में है 🌍
जबकि मैं कब्र से आवाज़ लगाऊं तो
लगाऊं कैसे 🗣️
तू साल में एक बार आए,
चादर और फूल चढ़ाए 🕊️
🌸 चंद आँसू बहा कर मुझे मनाए 😢 तो
मैं मान जाऊं कैसे 🤷♂️
तेरे एक दिन आने से,
मैं अपना बाकी साल का दिन
भुलाऊं तो भुलाऊं कैसे 📅
तू मान भी जाए तो
मैं खुद को मनाऊं तो मनाऊं कैसे 🫂
✍️ रचनाकार: यशवन्त कुमार गुप्ता
🎯 उद्देश्य :
इस कविता का उद्देश्य एक टूटे हुए प्रेमी की गहराई से भरी भावनाओं को व्यक्त करना है —
💔 रूठे हुए प्यार को मनाने की कोशिश, ⚰️ मृत्यु के बाद भी प्रेम की पुकार, 😢 दर्द को स्वीकार कर उसे सुंदरता में बदलना, 🕊️ एक ऐसी रचना जो रूह को छू जाए और दिल को झकझोर दे।
✍️ यह कविता उन सभी के लिए है जो इश्क में लुटे हैं, मरे हैं, और फिर भी उस प्यार को अमर मानते हैं।
मुख्य बिंदु:
· 💔 रूठे प्रेम को मनाने की तड़प: कवि उस दर्द को महसूस करता है जो उसने अपने प्रेमी को दिया है, और अब उसे मनाने की कोशिश कर रहा है।
· ⚰️ मृत्यु के बाद भी प्रेम की पुकार: कविता में कवि कब्र से भी प्रेमिका को पुकारता है, यह दर्शाता है कि उसका प्रेम मृत्यु से भी परे है।
· 😢 एकतरफा इश्क की पीड़ा: कवि ने इश्क में सब कुछ खो दिया — खुद को, अपनी पहचान, और अब वह मिट्टी में दबा हुआ है।
· 🕊️ साल में एक दिन की मुलाकात से संतोष नहीं: प्रेमिका साल में एक बार आती है, लेकिन कवि उस एक दिन से पूरे साल की तड़प को नहीं भुला सकता।
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📘 An English version of this poem is provided below for better understanding and collaboration.🌍
🌹 Title:
A Day’s Meeting — A Year’s Longing!
👤 Introduction:
Yashwant Kumar Gupta 🖋️ — Poetry is my soul, and words are my weapon. 💔
A writer drenched in the depth of love, turning pain into the language of beauty. ✨
📍 Location: India 🇮🇳
📚 Interests: Poetry ✨ | Emotional Writing 📝 | Self-Reflection 🤔
🪦 Even from the grave, I call out — hoping the world will one day hear my silence. 🎭
Every poem I write carries a story — mine, yours, and that silent ache we all share. 💫
💔 A Day’s Meeting — A Year’s Longing!
When you walk away from me 💔
How can I make you stay?
The pain I’ve given you,
How can I embrace it anyway? 😔
You say I don’t feel the hurt,
But how do I show what I hide? 😢
Without winning you back,
How could I even die? ⚰️
Even from the grave,
If I call you to my tomb,
How could I make you cry again? 🪦
I’ve loved, I’ve lost, I’ve perished 💘💀
I’ve been buried in the dust of love 🕳️
You’re caught in the world’s chaos 🌍
While I whisper to you from my silence,
How can I reach you? 🗣️
You visit once a year,
Lay flowers and prayers 🕊️
Shed a few tears 🌸
And think that heals it all —
But how can I forget the other 364 days? 📅
Even if you forgive me now,
How do I forgive myself? 🫂
✍️ Written by:
Yashwant Kumar Gupta
🎯 Purpose:
This poem expresses the depth of a broken lover’s heart —
💔 His yearning to mend a lost love,
⚰️ His voice echoing beyond death,
😢 His pain turned into poetry,
🕊️ His soul still waiting for that one meeting that never ends.
🌟 Core Themes:
💔 The ache of reconciliation: The poet tries to make peace with a love he himself broke.
⚰️ Love beyond death: Even from the grave, his soul calls out.
😢 The agony of one-sided love: He lost himself in love and remains buried in its dust.
🕊️ A fleeting reunion: One day of remembrance cannot heal a year’s longing.


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