विषय: रिश्तों में बहता जल
परिचय : हमारी कविता उन रिश्तों की कहानी है जो वक्त के साथ बदल जाते हैं—जहाँ जाने वाले पलटकर नहीं आते और अपने भी पास बुलाते नहीं। आईने-सा स्थिर मन, रूठे लोग, बहता समय और टूटे सपनों का दर्द इसमें गहराई से उभरता है। संवेदनाओं से भरी यह रचना दिल को छू जाती है। 💔🌧️✨
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| कभी पास बुलाने वाले लोग, समय बदलते ही दूर क्यों हो जाते हैं…? ये कविता रिश्तों, बिछड़ने और मन की तन्हाइयों को समर्पित है। |
आइए महसूस करें —
💔 पास बुलाते नहीं – एक दर्द भरी कविता 🌙✨
ज़िन्दगी में जो थे,
अब कुछ कहते नहीं; 😔
जाते हुए लोग
अब पलटते नहीं। 🚶♂️💨
मैं आईना था—🪞
वहीं का वहीं पड़ा रह गया।
मैं जहाँ था,
वहीं का वहीं खड़ा रह गया। 🧍♂️
वो लोग ही क्या,
जो दुख में साथ निभाते नहीं। 😢
निकल गया मतलब—
तो अब मुस्कुराते नहीं। 😔
जिनके पास मैं था,
वो अब
मुझे पास बुलाते नहीं। ❌💔
जाने वाले को
कौन रोक सकता है? 🤷♂️
यहाँ तो रोने वाले पर—
लोग हँसते हैं,
हँसाते नहीं। 😞
शायद कुछ कमियाँ
रही ही हमारी;
इसीलिए वो लोग
अब मेरे नखरे उठाते नहीं। 🙁
शायद यही सोचकर
वो अब मुझे पास बुलाते नहीं। 💔
रूठे हुए हैं जो मुझसे—
वो अब
मुझे कोई कहानी सुनाते नहीं। 📖😢
ज़िंदगी यूँ ही गुज़री, मानो
नदी का बहता जल हो; 🌊
बिछड़ जाए कोई किसी से—
तो मर जाते नहीं। 😔
शायद यही सोचकर
तुम मुझे पास बुलाते नहीं। ❌💔
मैं नींदों में भी चल रहा था, 🌙
ख़्वाबों में सो गया था। 💭
मगर ओ मेरे अपने ही थे—
जिन्होंने मेरे सर से चादर
उठाते नहीं। 🛏️😢
जिनके पास मैं था,
वो अब
मुझे पास बुलाते नहीं। 💔
कवि:
यशवंत कुमार गुप्ता
🎯 कविता का उद्देश्य ✨
हमारी कविता का उद्देश्य रिश्तों की सच्चाई को उजागर करना है—यह दिखाना कि समय और परिस्थितियाँ लोगों को कैसे बदल देती हैं। कविता हमें यह समझाती है कि हर कोई दर्द में साथ नहीं देता, और हर बिछड़न मौत नहीं होती। यह रचना आत्मचिंतन, स्वीकार और भावनात्मक परिपक्वता की ओर संकेत करती है, ताकि इंसान खुद को समझे और टूटे बिना आगे बढ़ सके। 💔➡️💫
मुख्य बिंदु:
· रिश्तों का बदलना:
जो कभी करीब थे, अब दूर हो गए और लौटकर नहीं आते।
· अकेलापन और स्थिरता:
कवि खुद को आईने की तरह स्थिर महसूस करता है—लोग बदल गए, पर वह वहीं खड़ा है।
· मतलब निकलने पर दूरी:
लोग दुख में साथ नहीं देते; मतलब खत्म होते ही हँसी भी गायब हो जाती है।
· न बुलाए जाने का दर्द:
अपने लोग अब पास बुलाते नहीं, जिससे गहरी चोट लगती है।
· जाने वालों को रोकना असंभव:
रिश्तों में बिछड़न रुकता नहीं; दुनिया रोने वालों को भी समझती नहीं।
· ज़िंदगी का बहाव और आत्मचिंतन:
समय नदी की तरह बहता है, और कवि खुद की कमियों और अकेलेपन को स्वीकार करता है।
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📘 An English version of this poem is provided below for better understanding and collaboration.🌍
Title: They Don’t Call Me Close – A Poignant Poem 💔
Subject: The Flow of Relationships
Introduction:
This poem tells the story of relationships that change with time—where those who leave never return, and even our loved ones don’t call us close anymore. Like a still mirror, it reflects the pain of estranged hearts, fleeting moments, and broken dreams. A deeply emotional piece that touches the soul. 💔🌧️✨
________________________________________
💔 They Don’t Call Me Close – A Poignant Poem 🌙✨
The ones who were part of my life,
Now, they say nothing; 😔
Those who walked away,
No longer turn back. 🚶♂️💨
I was like a mirror—🪞
Left standing, just the same.
Where I was,
I remain rooted. 🧍♂️
What are those people,
Who don’t stand by in sorrow? 😢
When usefulness fades—
Even smiles vanish. 😔
The ones I was close to,
Now
Don’t call me near. ❌💔
Who can stop someone leaving? 🤷♂️
Even here, when tears fall—
People laugh,
They don’t console. 😞
Perhaps there were flaws
In me too;
And that’s why they
No longer tolerate my quirks. 🙁
Perhaps that’s why
They don’t call me close anymore. 💔
Those who are upset with me—
Now,
Don’t share any stories. 📖😢
Life passed like flowing water, 🌊
Even when someone parts ways—
We don’t die. 😔
Perhaps that’s why
You don’t call me close. ❌💔
Even in sleep, I was walking, 🌙
In dreams, I had fallen asleep. 💭
Yet, it was my own people—
Who never lifted the sheet off my head. 🛏️😢
The ones I was close to,
Now
Don’t call me near. 💔
Poet:
Yashwant Kumar Gupta
________________________________________
🎯 Purpose of the Poem ✨
This poem highlights the truth about relationships—showing how time and circumstances can change people. It reminds us that not everyone will stand by us in pain, and parting ways doesn’t mean the end. The poem encourages self-reflection, acceptance, and emotional maturity, guiding one to understand themselves and move forward without breaking. 💔➡️💫
Key Points Themes:
• Changing Relationships: Those once close are now distant and never return.
• Loneliness and Stillness: The poet feels like a mirror—unchanging while people around him change.
• Distance When Interest Ends: People disappear when their interest wanes; laughter fades too.
• The Pain of Not Being Called Close: Loved ones no longer reach out, leaving deep hurt.
• Unstoppable Departures: Separation in relationships can’t be prevented; even grief isn’t always understood.
• Life’s Flow and Self-Reflection: Life flows like a river, and the poet accepts flaws and solitude, embracing emotional growth.
💬 अपना प्यार और सुझाव ज़रूर बताएं!
#संक्षिप्त विवरण
हमारी कविता रिश्तों की दूरी, अकेलेपन और बिछड़न के दर्द को बयाँ करती है। हर दर्दनाक पल को शब्दों में जीवंत किया गया है। 🌙✨
#कविता, #रिश्तों_का_दर्द, #अकेलापन

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