🩺✨ कविता का परिचय:
"सपना जो सफेद कफन में मरा" 🕯️
यह कविता उस मासूम महिला डॉक्टर 👩⚕️ की अंतिम पुकार है,
जो 2024 में अस्पताल की ड्यूटी के दौरान,
दरिंदगी का शिकार बनी।
यह रचना सिर्फ उसकी कहानी नहीं —
बल्कि हर उस बेटी की आवाज़ है
जो अपने सपनों को सहेजते हुए भी सिस्टम से हार जाती है। 💔
यह कविता उस टूटे हुए सफेद कोट की गवाही है,
जहां जीवन बचाने वाली खुद न्याय की याचक बन गई।
⚖️ यह समाज, कानून और
हमारे अंतर्मन को झकझोरने वाली एक चिंगारी है,
जो तब तक नहीं बुझेगी ,
जब तक न्याय की लौ पूरी तरह जल न उठे। 🔥
🙏 यह कविता पढ़ें, महसूस करें
और उसकी न्याय की माँग में साथ खड़े हों।
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| ✍️ एक न्याय की कविता 🌍 yashswarg.blogspot.com से।" – कुमार गुप्ता द्वारा |
🎤 एक काव्यात्मक एकालाप – “शब्द जो चुप नहीं रहते”
> ✍️ मेरे शब्द केवल पंक्तियाँ नहीं हैं — ये टूटे हुए सपनों की राख से उठे हैं।
🕯️ वे उन बेजुबानों की आवाज़ हैं,
जिन्हें वर्षों से सिर्फ “संवेदना” दी जाती है — पर न्याय नहीं ⚖️।
🖋️ मैंने जो लिखा है, वह सिर्फ लेखनी नहीं — एक गवाही है।
🔥 ये कविता नहीं, आग है,
जो कभी एक अदालत के कमरे में गूंज सकती है ⚖️,
तो कभी एक मोमबत्ती 🕯️ की शांति में भी हिला सकती है सत्ता की नींव 🏛️।
😤 मैं क्रोधित हूँ — पर टूट कर नहीं बिखरा,
💔 मैं घायल हूँ — पर अब चुप नहीं !
📢 न्याय की मेरी यह पुकार —
कलम से निकली है, पर तलवार से कम नहीं ⚔️।
🕊️ वो सपना जो सफेद कफ़न में मरा 😔
वह सपना... जो सफेद कफ़न में दफन हुई!
कभी ना सोची थी वैसी इतिहास उत्पन्न हुई! 🤔
कभी पाई थी जिसको ख्वाबों में,
उसे भी खो दिया मैंने... 💔🌑
🌸 हसीन सपना थी — डॉक्टर बनने की,
मगर वो भी खो गई...
दरिंदों के अंधियारों में... 👩⚕️⚰️👿
🔍 कातिल कौन है — ढूंढ़ लेना,
ना छोड़ना उन्हें दिन के उजालों में... ☀️
ये कब किसके साथ हैवानियत कर जाए…
इनकी नस्ल मिटा देना,
इंसानियत के ज़माने में... 🔥❌🧟♂️🌍
🕊️ मेरे ख्वाब... मेरे सपने...
सब दफन हो गई...
मैं थी — माँ-बाप की लाडली... 👨👩👧💔
⚔️ लड़ते-लड़ते
दुनिया से ओझल हो गई...
जहाँ ज़िंदगी बचती थी,
वहीं मृत्यु हो गई... 🏥☠️
📜 डॉक्टर बनने की सपना...
अब बस पुलिस की डायरी में,
सिमट कर अधूरी रह गई... 🚔📖
टूटी हर सपने, और हर इच्छा
अधूरी रह गई...! 😞
👣 जहाँ जीवन बचती थी,
वहीं मृत्यु हो गई...
माँ-बाप की लाडली...
दुनिया को अलविदा कह गई... 😭🌼
⏳ इंसाफ मिलने में समय लगती है,
पर आग बुझी नहीं,
आज भी धुआँ उठता है… 🔥💭
⚖️ जब तक न्याय नहीं मिलेगी,
तब तक ये चिंगारी
धीरे-धीरे सुलगती रहेगी। 🌪️🔥
🇮🇳 आज देश खड़ा है ,
उस डॉक्टर के लिए,
और पूछ रहा है —
"दरिंदे अब कहाँ तक तू बचता हैं?" ❓❗
✍️ कुमार गुप्ता
❤️🔥 भाव और उद्देश्य
ये कविता सिर्फ एक श्रद्धांजलि नहीं,
ये है एक आह्वान,
ताकि कोई और "सफेद कोट"
भविष्य में खून से लाल न हो…
📜 "वो सपना जो सफेद कफ़न में मरी " –
(इतिहास/भावार्थ):
🩸 1. सच्ची घटना पर आधारित:
यह कविता 9 अगस्त 2024 को कोलकाता (R.G. Kar Medical College) में
एक 31 वर्षीय महिला डॉक्टर के साथ हुए
बलात्कार और हत्या की घटना से प्रेरित है।
👉 यह घटना भारत के चिकित्सा क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल उठाती है।
🕊️ 2. सफेद कोट का अपमान –
जीवन रक्षक बनी न्याय याचक:
डॉक्टर का सफेद कोट, जो जीवन की उम्मीद होता है,
वही इस कविता में कफ़न का रूप ले लेता है।
👉 “जहाँ जीवन बचती थी, वहीं मृत्यु हो गई” — यह लाइन व्यवस्था की विफलता का प्रतिनिधित्व करती है।
न्याय की गुहार कविता है किसी की आवाज
न्याय नहीं मिलेगी तो आग उगलेगी कलाम की आवाज
⚖️ 3. न्याय की प्रतीक्षा और चिंगारी:
कविता यह दिखाती है कि अभी तक आरोपी को सज़ा नहीं मिली,
और सिस्टम की निष्क्रियता इस आग को बुझने नहीं देती।
👉 ये रचना एक “Slow-burning Justice Cry” है —
जब तक न्याय नहीं मिलता, यह चिंगारी जलती रहेगी।
💔 4. एक परिवार का टूटना — हर भारतीय की पीड़ा:
"माँ-बाप की लाडली" शब्द हर पाठक को अंदर तक हिला देता है।
👉 यह सिर्फ एक बच्ची की मौत नहीं,
बल्कि हर घर की बेटी के सपनों पर हमला है।
🧠 5. कविता का उद्देश्य – सामाजिक चेतना और जागरण:
यह रचना श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक चेतावनी, एक प्रार्थना और एक प्रतिज्ञा है।
👉 कविता हर पाठक को ये सोचने पर मजबूर करती है —
“कब तक बेटियाँ यूँ ही सपनों में मारी जाएँगी?”
🗣️ 6. एक आंदोलन की आवाज़ बन सकती है:
यह कविता प्रदर्शन, जागरूकता अभियान, मेडिकल कॉलेजों में सेमिनार और
न्याय की मांग के मंच पर पढ़ी जा सकती है।
👉 यह शब्द नहीं — सबूत, गवाही और क्रांति की आवाज है।
जब कलम झुके तो दरिया दिली और जब कलम उठ तो तलवार है!
👉एक माँ अब भी कोट की जेब में बेटी की तस्वीर रखकर,
हर दरवाज़े को खटखटा रही है…
सुनो न्यायपालिका —
उसके आंसुओं की कोई सुनवाई बाकी है!" 💔👩⚕️
> "उस माँ-बाप के आँसुओं की भाषा हम कविता में बोलेंगे,
जब तक न्याय नहीं मिलेगा —
हम चुप नहीं बैठेंगे…"
✍️ कुमार गुप्ता
🌿 अगर ये कविता आपके मन को छू गई हो,
तो नीचे दी गई और रचनाएं भी आपके दिल को ज़रूर छुएंगी... 💭💚
👇👇📚✨
- तू ये मत सोच कितना गिरा – प्रेरणात्मक कविता ! :- "मैं भी खड़ा था, बारिश से बात कर रहा था..." 👉चुपके से पीछे की जंग को उजागर करती, एक आत्म-परख की कविता
- तुझ से मेरा एतबार था – भावनात्मक कविता:- "तुझ से मेरा एतबार था..." जब भरोसा टूटा, तब कलम ने लिखा — 👉एक ऐसी शायरी जो दिल से निकली... और आत्मा तक पहुँची।
- 🕊 नफ़रत के दौर में मोहब्बत की बात- शांति और मानवता पर आधारित कविता:- 🕊 आइए, एक कदम उठाएँ-नफ़रत को नहीं, इंसान को अपनाएँ।:- 🌿 इंसान से इंसान को लड़ने ना दो।
- परदे के पीछे का सच – सामाजिक जागरूकता पर एक भावनात्मक कविता:-"ये क़ाग़ज़ नहीं, एक मशाल है – अब सच को चुप कराना मुमकिन नहीं! " 👉कविता के ज़रिए समाज कीचुप्पी को तोड़ने वाली, एक भावनात्मक प्रस्तुति
- अनुभवों की सदाकत- जहाँ हर शब्द जीवन की गवाही बनती है- सामाजिक कविता:-अनुभवों की सदाकत एक सामाजिक कविता जो, जीवन के सत्य, भावनाओं और समाज की उलझनों को अनुभवों की रोशनी में प्रस्तुत करती है।
📘 An English version of this poem is provided below for better understanding and collaboration.
🩺✨ Poem Introduction:
🕯️ “The Dream That Died in a White Coffin”
This poem is the last cry of a kind lady doctor 👩⚕️
who was attacked and killed during her hospital duty in 2024.
It is not only her story —
but the voice of every daughter
who tries to follow her dreams,
but loses to the system. 💔
Her white coat — meant to save lives —
became a symbol of her pain and death.
⚖️ This poem is a fire that speaks to society and law.
It will keep burning
until justice is done. 🔥
🙏 Please read this poem, feel her pain,
and stand for her justice.
🕊️ The Dream That Died in a White Coffin 😔
That dream… was buried in a white coffin.
We never thought such history would happen. 🤔
💭 I once saw this dream in my sleep…
But now, I have lost it. 💔🌑
🌸 It was a sweet dream — to become a doctor.
But it was lost in the darkness of evil. 👩⚕️⚰️👿
🔍 Who is the killer? Find them.
Do not let them hide in daylight. ☀️
These monsters can hurt anyone.
They must not be allowed to live among humans. 🔥❌
🕊️ My dreams… my hopes…
All are gone now.
I was the beloved daughter of my parents. 👨👩👧💔
⚔️ I kept fighting…
but now, I have disappeared from this world.
The place where I saved lives…
became the place where I died. 🏥☠️
📜 My dream to become a doctor…
is now only written in the police file. 🚔📖
My dreams and hopes…
all stayed incomplete. 😞
👣 The place where people lived…
became my place of death.
A loving daughter…
said goodbye to the world. 😭🌼
⏳ Justice is taking time.
But the fire in hearts is still alive. 🔥💭
⚖️ Until justice is given,
this pain will burn slowly. 🌪️🔥
🇮🇳 Today, the whole country stands
for that doctor.
And asks —
"How long will these monsters hide?" ❓❗
✍️ Kumar Gupta
❤️🔥 Meaning and Message
This poem is not just a tribute.
It is a call for justice —
So that no more white coats
are stained with blood in the future.
📜 Real Story Behind the Poem:
🩸 1. Based on a true incident:
On August 9, 2024, in Kolkata (R.G. Kar Medical College),
a 31-year-old lady doctor was raped and murdered.
👉 This raises serious questions about women’s safety in hospitals.
🕊️ 2. Her white coat became her coffin:
The white coat, a symbol of life,
became a symbol of death.
👉 “The place that saved lives became the place of death.”
⚖️ 3. Waiting for justice:
Even after many months, the killer is not punished.
👉 This poem is a slow-burning cry for justice.
💔 4. A broken family — a nation's pain:
The line “Beloved daughter of her parents”
hurts every heart.
👉 This is not just one girl’s death —
it’s a loss for every home.
🧠 5. Purpose — to awaken society:
This poem is not only a tribute —
It is a warning, a prayer, and a promise.
👉 It asks:
“How long will daughters keep dying in silence?”
🗣️ 6. A voice for change:
This poem can be read in protests,
in schools, colleges, hospitals, and in courts.
👉 These are not just words —
They are proof, they are fire.
“When the pen bows, it shows kindness…
But when it rises, it becomes a sword!” ✒️⚔️
💔 A mother still knocks on every door,
with her daughter’s photo in the coat pocket.
“Dear Justice System…
Her tears still wait for an answer.” 👩👧⚖️
“We will speak for that mother’s pain through poetry…
Until justice comes —
We will not stay silent.”
✍️ Kumar Gupta
✍️ एक न्याय की कविता
🌍 yashswarg.blogspot.com से।"
– कुमार गुप्ता द्वारा

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