सहारा बनकर जो मिले, वो भी किनारा निकला: हर पड़ाव पर अकेलेपन की कहानी।
विषय:- जिन्दगी की नाव, बिना पतवार के
✨ कविता का परिचय ✨:🧒👨🦳 बचपन से बुढ़ापे तक का सफर...
हर ख्वाब टूटा, हर उम्मीद बिखरी... जिन्दगी ने जितना दिया,
उससे ज़्यादा छीन लिया। यह रचना उस
दर्द की दास्तान है,
जो अक्सर मुस्कान के पीछे छिपा
रहता है।
🚶♂️ एक अकेला मुसाफिर...
जिसे ना बचपन ने अपनाया, ना जवानी ने थामा, और अब बुढ़ापा भी सवालों से भरा है।
🔥 अब ना सहारा चाहिए, ना किनारा... बस एक फैसला चाहिए—खुद से, खुद के लिए।
✍️ लेखक: यशवंत कुमार गुप्ता एक संवेदनशील मन की गहराई से निकली आवाज़ !
![]() |
| 🌊 जिन्दगी की नाव… बिना पतवार के 🚣♂️ हर किनारा पराया, हर सफर अधूरा… 🔥 सपनों को जलाकर अब खुद से फैसला। ✍️ कुमार गुप्ता | yashswarg.blogspot.com |
🤝 अब आओ शुरू करे कुमार✍️ गुप्ता की कविता
🌊 जिन्दगी
का किनारा
👶 बचपन
में मिला था... कोई हमें हमारा बनकर
🧑🦱 जवानी
में मिला भी तो... हमें
किनारा बनकर
💭 हर
ख्वाब टूटा है हमारा यहाँ...
बस एक इंतजार की नसीहत बनकर
😔 जिन्दगी
जिया भी तो क्या
जिया... बस एक सहारा
बनकर
🚣♂️ जीवन
की नाव हमें चलाने आया ही नहीं... 🏝️ साहिल भी भटका, या
तो क्या भटका
👴 बुढ़ापे
के मोड़ पर... अब तो मैं
तैर भी नहीं सकता
👶 बच्चों
के मुंह देखकर... आज हमें अपना
नसीहत दे रहे हैं
🤷♂️ ना जाने किसकी ओर मुँह देखकर...
मैं भी तमाशा देख रहा हूँ अपनी जिन्दगी को बेचकर
🌊 उनकी
जिन्दगी भी शवर जाए...
मुझको डूबोकर
🚫 अब
मुझे सहारा भी नहीं चाहिए उनको बचाकर
🔥 बड़ी
बेवकूफ़ हूँ यार जिन्दगी को जलाकर
⚖️ अब तू ही मेरा
फैसला कर तू मेरा
क्या कर
📝 मैं तो अपना रचनाकार...
✍️ लेखक: यशवंत कुमार गुप्ता
🎯 कविता का उद्देश्य
🧠 सोच
को जगाना — यह कविता उन
भावनाओं को आवाज़ देती
है जिन्हें अक्सर हम अंदर ही
अंदर दबा लेते हैं।
💔 अकेलेपन
की सच्चाई — जीवन के हर पड़ाव
पर जो खालीपन महसूस
होता है, उसे शब्दों में ढालकर सामने लाना।
👀 तमाशा
नहीं, समझ — यह रचना एक
पुकार है कि लोग
सिर्फ देखें नहीं, समझें भी कि हर
मुस्कान के पीछे एक
कहानी होती है।
🪞 आत्मचिंतन
— पाठक खुद से सवाल करें:
क्या हम किसी के
लिए सहारा हैं या सिर्फ किनारा?
🔥 जिन्दगी
की आग में जलते सपनों की गवाही — ताकि लोग महसूस करें कि हर इंसान
की कहानी अनमोल है, चाहे वो कितनी भी
टूटी हो।
✍️
लेखक की आत्मा की झलक — यशवंत कुमार गुप्ता जी की यह
कविता उनके अनुभवों, भावनाओं और जीवन के
संघर्षों की सच्ची अभिव्यक्ति
है।
🔑 तीन मुख्य बिंदु
1. 💔
हर पड़ाव पर अकेलापन: बचपन, जवानी और बुढ़ापा—तीनों
ही जीवन के चरणों में
अपनापन नहीं मिला, सिर्फ किनारा और इंतजार।
2. 🔥
जिन्दगी का तमाशा बन जाना: जब खुद की
जिन्दगी को दूसरों के
लिए जीते-जीते, इंसान खुद ही दर्शक बन
जाता है अपने ही
दर्द का।
3. ⚖️ आत्मनिर्णय की पुकार: अब किसी सहारे की चाह नहीं—बस खुद से सवाल, खुद से जवाब। “अब तू ही मेरा फैसला कर…”
🌿 अगर यह कविता आपके मन को छू गई हो,
तो नीचे दी गई और रचनाएं भी आपके दिल को ज़रूर छुएंगी... 💭💚
👇👇📚✨ और कविताएं पढ़ें:-
🔹 भारत के सपूत – देशभक्ति कविता संग्रह
जहां हर शब्द में बहादुरी की आवाज़ है।
🔹 सुरक्षा-औद्योगिक कविता संग्रह
जहां मेहनत, अनुशासन और सुरक्षा के रंग बिखरे हैं।
जो जीवन के उतार-चढ़ाव को शब्दों में पिरोती है।
🕊 यह संग्रह उन दिलों के लिए है जो टूटी आवाज़ों में भी कविता ढूंढते हैं। 🕊
🔹 रिश्तों की खुशबू — कविता संग्रह
👉जहाँ हर कविता एक रिश्ता बयां करती है...
🧋 जब ज़िंदगी को चाहिए थोड़ा मस्ती का स्वाद
🔹 List of Poems / कविताओं की सूची
जहां यशस्वर्ग की हर कविता एक👆 क्लिक की दूरी पर है।
📘 An English version of this poem is provided below for better understanding and collaboration.
Title: – The Boat of Life Without Oars
✨ Poem Introduction ✨
🧒👨🦳 From childhood to old age...
Every dream shattered, every hope scattered... Life took away more than it ever gave. This piece tells the tale of the pain that often hides behind a smile.
🌊 The Shore of Life
🎯 Purpose of the Poem
🔑 Three Key Points
✍️😊 ( Share your love and thoughts with us!
👇 Write in the comments — your feedback means a lot to us. ✍️😊)

0 टिप्पणियाँ
✍️ अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखें!
आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए मूल्यवान है।