कविता के माध्यम से, समाज का मार्गदर्शन!

कविता के माध्यम से, समाज का मार्गदर्शन!
जहां शब्द बनते हैं समाज की आवाज!
hindipoetry.in
✍️ कुमार गुप्ता

🌊 अजीब कुदरत का कहर — इंसान और जीवन की जिजीविषा ✨🔥

विषय:🌊 जीवन की उथल-पुथल और संघर्ष की लहरें — समंदर की 🌊✨

परिचय: इस कविता में  ✍️ हमने ये दिखाने की कोशिश की हैं कि जीवन में चाहे कितनी भी लहरें

 🌊 और तूफान 🌪️ आएँ, इंसान की जिजीविषा 💪 और उम्मीद ✨ कभी कम नहीं होती।


हर संघर्ष हमें और मजबूत बनाती है 🔥, और हमारी अंदरूनी शक्ति को जगाती है।


🌿 आइए पढ़ें और महसूस करें जीवन की ताकत और संघर्ष की गहराई 💭💚


संघर्ष की लहरों में उम्मीद की झलक और जीवन की जिजीविषा पर प्रेरणात्मक कविता का बैनर
🌊 संघर्ष की लहरों में उम्मीद की झलक ✨ —
 हर कठिनाई में सीख और ताकत 📚।
यह कविता जीवन की जिजीविषा और संघर्ष की कहानी बयां करती है। 💪🔥


अब आओ शुरू करे कुमार✍️ गुप्ता के साथ ...

  🌊 अजीब कुदरत का कहर ✨🔥


अजीब कुदरत का कहर है 🌪️
मानव के साथ क्या? 🤔
कुछ कर गुजर रहा है 🌱
तब भी मैं पूछता था,

तबीयत कैसी है आपकी 💭
जबकि मैरिज 💍
मैं भी जी रहा हूँ 💪।

धुआं धुआं सा हो गया 🌫️,
सुलग तो मैं ही रहा हूँ 🔥।

लोग हमसे उम्मीद लगाए 👥,
जैसे मैं उनकी जीने का दावा हूँ 🫂।

धन्यवाद हो आपका 🙏
सहयोग करने के खातीर 💌,
आपसे कुछ मैं सीख रहा हूँ 📚।

यह जनकल्याण शिक्षण सफल हो 🌿,
आज मैं आपसे कुछ कह रहा हूँ 📝।

मरीज बनकर भी मुझे मौत ना छुएं ⚰️,
हर पल मैं जिन्दगी से लड़ रहा हूँ 💪❤️।

कहर तो हूँ मैं कुदरत का 🌪️,
लहरों की तरह डगमगाते हुए 🌊

किनारो को छु-छु कर 🏖️
समंदर की ओर बढ़ रहा हूँ 🌊✨।

शायद कोई मेरी भावनाओं को समझें 🤲
मैं क्या था, मैं क्या हो गया ❓

मैं क्या करके,
मैं क्या कर गुजर गया 🌀।

जब बूंद बनकर मर तो 💧,
समंदर की उम्र बढ़ गया 🌊⏳।

साइंस को समझते समझते 🔬,
मेरा उम्र गुजर गया ⌛

देखो आज इंसान कितना आगे निकल गया 🚀।

कुआं का मेंढक बोला 🐸,
दरिया से, तालाब से निकला और 🏞️
क्या-क्या देखना बाकी रह गया ❓

— कुमार गुप्ता ✍️


उद्देश्य 🎯


💊 यह कविता उन सभी लोगों के लिए है जो काम और जिम्मेदारियों के बीच खुद को मजबूत बनाकर जीवन की लहरों 🌊 से लड़ते हैं।


🔥 कवि दिखाना चाहता है कि चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ और थकावट हो, जिजीविषा 💪 और उम्मीद ✨ कभी खत्म नहीं होती।


🌿 यह प्रेरणा देती है कि हर चुनौती में सीख 📚 और ताकत छुपी होती है, और हम हर पल जीवन से लड़ते हुए आगे बढ़ सकते हैं 💖


कविता के मुख्य बिंदु 🔑


1. जीवन की लहरें 🌊 – काम और जिम्मेदारियों के बीच इंसान को लगातार संघर्ष और चुनौतियों 🔥 का सामना करना पड़ता है।


2. जिजीविषा 💪 – हर कठिनाई और थकावट के बावजूद, जीवन से लड़ने की इच्छा ✨ हमेशा बनी रहती है।


3. सीख और अनुभव 📚 – रोज़मर्रा के संघर्ष हमें मजबूत बनाते हैं और अंदर की ताकत 💖 जगाते हैं।


4. आशा और हिम्मत 🌟 – चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन हों, उम्मीद और साहस 🔑 हमें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाते हैं।


🌿 अगर यह कविता आपके मन को छू गई हो,

तो नीचे दी गई और रचनाएं भी आपके दिल को ज़रूर छुएंगी... 💭💚


👇👇📚✨ और कविताएं पढ़ें:-


🔹 भारत के सपूत – देशभक्ति कविता संग्रह

जहां हर शब्द में बहादुरी की आवाज़ है।

🔹 सुरक्षा-औद्योगिक कविता संग्रह

जहां मेहनत, अनुशासन और सुरक्षा के रंग बिखरे हैं।

🔹 ज़िंदगी भरी कविता संग्रह

जो जीवन के उतार-चढ़ाव को शब्दों में पिरोती है।

🔹दर्द भरी कविता संग्रह 

🕊 यह संग्रह उन दिलों के लिए है जो टूटी आवाज़ों में भी कविता ढूंढते हैं। 🕊

 🔹 रिश्तों की खुशबू — कविता संग्रह

   👉जहाँ हर कविता एक रिश्ता बयां करती है...

 🔹मस्ती भरी कविता संग्रह

🧋 जब ज़िंदगी को चाहिए थोड़ा मस्ती का स्वाद

🔹 List of Poems / कविताओं की सूची

जहां यशस्वर्ग की हर कविता एक👆 क्लिक की दूरी पर है।


📘 An English version of this poem is provided below for better understanding and collaboration.


Topic 🌊 : “The Tides of Life — Waves of Struggle and the Ocean Within 🌊✨”


Introduction ✍️: In this poem, we try to show,
🌊 No matter how many storms may blow 🌪️,
Hope ✨ and willpower 💪 never die,
They lift us up, they make us fly. 🕊️


Every struggle makes us strong 🔥,

Awakens the strength we’ve held all along.

🌿 Come, let’s read and truly see,

The power of life, its depth, its sea 💭💚.


🌊 Strange Wrath of Nature ✨🔥


The wrath of nature, strange and wild 🌪️,

What’s it doing to humankind? 🤔

Yet still I ask with gentle care,

💭 “How’s your health? Are you aware?”


Though marriage vows 💍 I too sustain,

💪 I live this life through joy and pain.

Smoke surrounds, my heart’s aflame 🌫️🔥,

I burn inside, yet bear the blame.


People look with hopes on me 👥,

As if I hold life’s guarantee 🫂.

I thank you all 🙏 for being near,

💌 Your help has taught me lessons clear 📚.


This welfare path, may it succeed 🌿,

I speak today of what I need 📝.

Even as a patient, I fight death’s hand ⚰️,

💪❤️ Struggling each day to firmly stand.


I am the storm, nature’s own might 🌪️,

Like waves that stumble through the night 🌊.

Touching shores, yet moving on 🏖️,

🌊✨ Toward the ocean, where I belong.


Perhaps someone may truly see 🤲,

What I once was, what’s left of me ❓.

What I have done, what slipped away 🌀,

The price I paid along the way.


A drop may fall, its life be done 💧,

But the ocean’s age has just begun 🌊⏳.

In learning science, my years were spent 🔬⌛,

See how far mankind has went 🚀.


The frog once told the river’s call 🐸,

From pond to stream, it left its wall 🏞️.

Yet much remains it hasn’t found ❓,

The world beyond, so vast, profound.


— ✍️ Kumar Gupta


Purpose 🎯


💊 This poem is for those who stand,

Balancing life with work in hand. 🌊

🔥 It shows that though we toil and tire,

Hope ✨ and will 💪 never expire.


🌿 It inspires us that every test,

Holds hidden strength within our chest 📚.

💖 Each challenge faced, each moment fought,

Gives power, courage, lessons taught.


Key Points 🔑


1. Waves of Life 🌊 – In duties and tasks, each day we strive,

Through struggles 🔥 we keep alive.


2. Will to Live 💪 – No matter how heavy the load we bear,

✨ The spark of life is always there.


3. Lessons Learned 📚 – From daily battles, wisdom flows,

💖 Inner strength in silence grows.


4. Hope and Courage 🌟 – Though storms may shake and shadows fall,

🔑 Hope and bravery guide us all.


✍️😊 ( Share your love and thoughts with us!
👇 Write in the comments — your feedback means a lot to us. ✍️😊) 

क्या आपने भी कभी ऐसा महसूस किया है अपनी राय ज़रूर दें

क्योंकि हर कहानी एक आवाज़ चाहती है।


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ