कविता के माध्यम से, समाज का मार्गदर्शन!

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✍️ कुमार गुप्ता

हुस्न, इश्क़ और आईने की सच्चाई ✍️ — कुमार गुप्ता

 🎭 विषय :💞 इश्क़ की मासूमियत, इंतज़ार की बेचैनी और अपनेपन पर उठते सवालों का संगम 🌙✨


🌿 परिचय : यह कविता 💌 दिल से निकली एक रचना है जिसमें मोहब्बत, जुदाई, इंतज़ार और आत्मचिंतन की भावनाएँ जुड़ी हैं।


हर शेर में प्यार की मिठास है, तो आख़िर में सवाल है — क्या यह मोहब्बत सच्ची है या मज़ाक ?


हुस्न ये जिगर का — प्रेम और इंतज़ार की दास्तां ✍️ एक रोमांटिक हिंदी कविता जिसमें मोहब्बत, यादें और जुदाई की भावनाएं झलकती हैं।
🌹 ‘हुस्न ये जिगर का’ — यह कविता मोहब्बत की मासूमियत,
इंतज़ार की बेचैनी और दिल की गहराइयों में छिपे सवालों को बयां करती है। ✨


✍️आऔ शुरू करे कुमार गुप्ता के साथ। 


👉हुस्न ये जिगर


💫 हुस्न ये जिगर का,

🌹 दीदार हुआ है।

💖 तुमको मुझसे प्यार हुआ है।

💭 कहते थे एक दिन तुम्हारे बिना,

😔 जीवन मेरा दुश्वार था।

🌸 आज जिंदगी में ये कैसा बहार है।

जहां खिले हैं फूल 🌺,

वहाँ कांटों को आज भी 🌵,

किसी कली 🌼 को ,

डाली पे इंतजार है।

🌆 सुहाने शाम की,

🍃 मौसम भी याद है।

जहां तुम्हारी ⏳ इंतजार है।

🌙 आज की रात गुजारी जहां,

✨ रोशनी की इम्तिहान है।

💓 तुम थी मेरी सांसों में,

🌅 तुमसे ही जीवन की शुरुआत है।

🛤️ सफर का अंत जैसे हुआ।

जहां नफरत के सिवाय 💔

और कुछ ना बात है।

🪞 जिस आईने में ख्वाब देखते हो,

आज इस आईने में 💕 मोहब्बत की आंच है।

🤔 सच पूछता हूं आज

क्या कुमार गुप्ता किसी के लिए खास है❓

या किसी परदे के पीछे, 

 किसी का 🎭 मजाक है।

✍️ कुमार गुप्ता


🎯 उद्देश्य :


1. दिल की गहराइयों से निकली मोहब्बत को शब्द देना।


2. इंतज़ार और जुदाई की बेचैनी को पाठक के दिल तक पहुँचाना।


3. पाठकों को सोचने पर मजबूर करना — 

क्या प्यार हमेशा सच्चा होता है या कभी मज़ाक भी बन जाता है?


4. कविता को एक आईने की तरह पेश करना जिसमें हर कोई अपने हालात देख सके।


🔑 मुख्य बिंदु :


1. 🌹 मोहब्बत और इंतज़ार का इज़हार — हर पंक्ति में चाहत झलकती है।


2. 🌙 जज़्बात और दर्द का संगम — प्यार और जुदाई दोनों एक साथ चलते हैं।


3. 🪞 आईना और सच का प्रतीक — मोहब्बत को परखने का रूपक।


4. 💭 आत्मचिंतन और सवाल — क्या प्यार सच्चा है या मज़ाक, 


यह सोचने पर मजबूर करता है।


🌿 अगर यह कविता आपके मन को छू गई हो,

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📘 An English version of this poem is provided below for better understanding and collaboration.🌍



🎭 Theme: 💞 Innocence of Love, Restlessness of Waiting & Questions of Belonging 🌙✨


🌿 Introduction:


This poem 💌 flows straight from the heart — weaving love, separation, longing, and self-reflection.


Each verse drips with sweetness of love, yet ends with a question — Is this love true or just a mockery?


✍️ Let’s begin with Kumar Gupta.


👉 “Beauty of the Heart


💫 The beauty of my heart,


🌹 Your vision appeared as art,


💖 And in your eyes I found,


A love so deep, profound.


💭 You once said without me,


😔 Life would be misery,


But today my soul feels strange,


🌸 As if spring has changed.


Where flowers bloom 🌺 in light,


Yet thorns 🌵 still hold tight,


A bud 🌼 awaits on the vine,


For love’s moment divine.


🌆 Sweet evenings call,


🍃 I still recall it all,


Where your presence stayed,


⏳ And your waiting played.


🌙 Tonight drifts by slow,


✨ A test of light’s glow,


💓 You breathed in my soul,


🌅 My life you made whole.


🛤️ Yet the journey ends near,


💔 Filled only with fear,


Nothing remains to speak,


But hatred’s streak.


🪞 In the mirror of my dreams,


💕 A fire of love still gleams,


But truth whispers clear,


Not all love is sincere.


🤔 Tell me today, I ask —


Is Kumar Gupta someone’s task,


Truly special, set apart ❓


Or just a 🎭 mocking part?


✍️ Kumar Gupta


🎯 Purpose:


1. To give words to the depth of true love ❤️.


2. To reflect the pain of waiting & separation ⏳.


3. To question — is love always true, or sometimes just a mockery? 💔


4. To hold up a mirror 🪞 where every reader can see their own emotions.


🔑 Key Points:


1. 🌹 Expression of love & longing — each line reflects desire.


2. 🌙 Blend of emotions — love & separation walk together.


3. 🪞 Symbol of mirror & truth — testing the purity of love.


4. 💭 Self-reflection & question — is love genuine or just a joke?

 


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