कविता के माध्यम से, समाज का मार्गदर्शन!

कविता के माध्यम से, समाज का मार्गदर्शन!
जहां शब्द बनते हैं समाज की आवाज!
hindipoetry.in
✍️ कुमार गुप्ता

सरल शब्द, गहरा असर –आस और काश!

 विषय: 🌍 जागरूकता और सोच – पाठकों के मन में सवाल और संवेदनशीलता जगाना।


👤 परिचय: आश" और "काश" की पंक्तियों में गहराई है जहाँ,

🪞 टूटे आईनों में छिपी सच्चाई है,

🔥 और कलयुग में इंसानियत की परछाई है।

📚 मेरी रचनाएँ न सिर्फ सोचने पर मजबूर करती हैं,

बल्कि दिल को छूकर आत्मा तक पहुँच जाती हैं।


एक व्यक्ति पहाड़ों और सूरज की रोशनी को निहारते हुए। टेक्स्ट लिखा है — आश और काश: कविताओं में इंसानियत, समाज और जीवन की आईना। सरल शब्द, गहरा असर। ✍️ कुमार गुप्ता
☀️ आश और काश —
इंसानियत, समाज और जीवन की सच्चाइयों पर आधारित कविता।
सरल शब्दों में गहरा असर
 ✨✍️ कुमार गुप्ता


आइए महसूस करें —

सरल शब्द, गहरा असर – आसान भाषा में दिल को छू लेने वाली प्रभाव को छोड़ना।


"यूं ही उम्र कट रही है दो अल्फ़ाज़ में
एक आश में और एक काश में।" 🌿💭

🕊️
ना जीयो धर्म के नाम पर
ना मरो धर्म के नाम पर,
इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं।
मरने का शौक है तो मरो
सिर्फ वतन के नाम पर। 🇮🇳❤️

🔥
हैवानियत की मिसाल है निर्लज्जता,
कुकर्मों का धर्म है नास्तिकता। ⚔️

🌍
और दुनिया हमसे ही खैरियत पूछती है
जो पहले से खुश है। 🙂

🧩
कुछ रिश्ते टूटे-फूटे नज़र आते हैं,

जो पहले से ही मिलावट की दस्तूर है। 🕸️💔

🪞
मैं करूं भी तो किस बात पे घमंड करूं,
यहां तो हर आईना ही चकनाचूर है। 💔🪞

🛤️
प्रश्न ये है कि अब हल कहां-कहां ढूंढे,
जिंदगी की राहों में सब व्यस्त और मगरूर है। 🚶‍♂️🌪️

😴
नींदों में ही जिंदगी सवरने लगे हैं,

जागते हैं तो जिंदगी सवाल खड़ा करने लगते हैं।
अब तो बिस्तर से उठाना भी दूर है। 🛏️

🍞📱
पास का रखा निवाला भी अब तो दुहाई मांगता है,
थका-हारा मोबाइल भी मनुष्य से रिहाई मांगता है। 📴

👤
अब तो इंसान इंसान ना रह गया,
इस कलयुग में रावण भी पीछे छूट गया। 🔥

🪞🌫️
धूल जम गई आईनों पे,
शीशा शरमा के तमाशा देखते रह गया।
ये सेल्फी के चक्कर में
लग रहा है ऐसे जैसे विज्ञान पीछे रह गया। 🤳⚙️

🌠

कोई तो किसी का अपना होगा,
जो आश में बैठे रह गया,
और दूसरा काश काश करते रह गया। 💭🌙

✒️ – कुमार गुप्ता

🌿 उद्देश्य 🌿


✍️ मेरी रचनाओं का उद्देश्य है

👉 इंसानियत को धर्म से ऊपर रखना,

👉 समाज की हकीकत को आईना दिखाना,

👉 और शब्दों के माध्यम से

दिलों में जागरूकता व संवेदनशीलता जगाना। 💖

मुख्य बिंदु: 


1. ✍️ सामाजिक सच्चाई का आईना – कविताओं के माध्यम से समाज की हकीकत को दर्शाना।


2. 🕊️ इंसानियत सर्वोपरि – धर्म से बढ़कर इंसानियत का संदेश देना।


3. 💭 आश और काश – उम्मीदों और हकीकतों के बीच की भावनाओं को शब्द देना।


4. 🌍 जागरूकता और सोच – पाठकों के मन में सवाल और संवेदनशीलता जगाना।


5. 🌟 सरल शब्द, गहरा असर – आसान भाषा में दिल को छू लेने वाली प्रभाव को छोड़ना।

🌿 अगर यह कविता आपके मन को छू गई

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📘 An English version of this poem is provided below for better understanding and collaboration.🌍

🌍 Theme: Awareness & Reflection


Awakening minds with questions,
Touching hearts with sensitivity. 💭✨


👤 Intro:
In the lines of Hope and Wish, lies the depth,
🪞 Truth hidden in shattered mirrors,
🔥 And humanity’s shadow in this modern age.


📚 My verses not only make you think,
But also touch the heart, reaching the soul. 💖

Feel the essence —
Simple words, deep impact. 🌟


🌿
“Life passes in just two words,
One in Hope and one in Wish.” 💭


🕊️
Don’t live in the name of religion,
Don’t die in the name of religion.
No faith is above humanity.
If you wish to sacrifice,
Sacrifice only for the nation. 🇮🇳❤️

🔥
Shamelessness is the face of cruelty,
And sins worship disbelief. ⚔️

🌍
The world still asks us if we’re fine,
Even those already happy. 🙂

🧩
Some bonds look broken,
Because they were always mixed with lies. 🕸️💔

🪞
What pride should I even carry?
Every mirror here is shattered. 💔

🛤️
Where to search for solutions now?
Everyone is busy, everyone is proud. 🚶‍♂️🌪️

😴
Life feels alive only in dreams,
Awake, it questions our existence.
Even rising from bed seems far away. 🛏️

🍞📱
Even the bread nearby asks for mercy,
The tired phone begs to be free from man. 📴

👤
Man is no longer man anymore,
Even Ravana seems left behind in this age. 🔥

🪞🌫️
Dust settled on every mirror,
Glass blushed, watching silently.
In this selfie-obsession,
Science feels left behind. 🤳⚙️

🌠
Someone must be waiting in hope,
While another kept saying Wish, Wish. 💭🌙

✒️ – Kumar Gupta

🌿 Purpose 🌿


✍️ My words aim to:
👉 Place humanity above all religions,
👉 Show society its own reflection,
👉 And awaken hearts with awareness & sensitivity. 💖


Key Points:


1. ✍️ Mirror of social truth – Reflecting society through poetry.


2. 🕊️ Humanity above all – A message beyond religion.


3. 💭 Hope & Wish – Emotions between dreams and reality.


4. 🌍 Awareness & thought – Raising questions in every mind.


5. 🌟 Simple words, deep impact – Easy language, powerful effect.



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