कविता के माध्यम से, समाज का मार्गदर्शन!

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जहां शब्द बनते हैं समाज की आवाज!
hindipoetry.in
✍️ कुमार गुप्ता

इश्क़ की अदालत: प्रेम की बीमारी !

विषय: एक ही साँस, फिर भी फ़र्क़ क्यों?

💔 परिचय — “इश्क़ की सज़ा”


इश्क़ ❤️ करने वालों को अक्सर सज़ा मिलती है,

कभी समाज से ⚖️, कभी अपनों से 💔।


इश्क़ ना धर्म देखता है, ना जात — फिर भी इश्क़ गुनाह बन जाता है।

मेरी कविता एक आवाज़ है 🗣️

उन दिलों की जो मोहब्बत में मिट जाते हैं,

पर दुनिया फिर भी नफ़रत बांटती है।


आओ — इस दुनिया को प्रेम की बीमारी लगाएं 💞

और इंसान को फिर से इंसान से मिलाएं। 🤝


समुद्र किनारे नीले आसमान के नीचे खड़ी एक युवती, जो आज़ादी और प्रेम का प्रतीक है। तस्वीर पर लिखा है “इश्क़ की अदालत: प्रेम की बीमारी” — एक संदेश जो भेदभाव मिटाकर इंसानियत और प्रेम फैलाने की प्रेरणा देता है। इसमें ब्लॉग का नाम yashswarg.blogspot.com और लेखक कुमार✍️गुप्ता का नाम शामिल है।
🌹 Love You Zindagi! 💞
आओ भेदभाव मिटाएँ ✊
 और दिलों में प्यार फैलाएँ 🌍

✨ प्रेम, समानता और मानवता की सच्ची कहानी ✨
✍️ — कुमार गुप्ता
🔗 और पढ़ें: yashswarg.blogspot.com


आइए महसूस करें —


इश्क़ की अदालत और प्रेम की बीमारी को! 


💖 इश्क़ की सज़ा 💖


इश्क़ करने वालों को 🚶‍♂️

जान से मार दिया जाता है। 💔


आख़िर क्यों इनके साथ

नाइंसाफ होता है ? ⚖️


कोई फूल 🌸 को कांटा समझा तो

जड़ से मिटा देता है। 🥀


आख़िर क्यों कोई इंसान

इतना कठोर हो जाता है? 😔


हम सबका जरिया एक है — 

साँस भी एक है, धड़कन भी एक है। 💓

इश्क़ करने वाला भी एक है,

मरने वाला भी एक है, ⚰️


जान देने वाला भी एक है,

और जान लेने वाला भी एक है। ⚔️


मगर सज़ा देने वाले अनेक हैं —

मैं पूछता हूँ उनसे, ❓


 तो क्यों इतना गहरा भेद-भाव है ? 🤷‍♂️


हम अपनी जान की दुश्मन को भी

'जान' कहते हैं; 💞

मोहब्बत की इस मिट्टी को हम

हिन्दुस्तान कहते हैं। 🇮🇳


जब इश्क़ में भेदभाव है तो,

मिटा दो इस फ़र्क़ को; ✋


ईमान तो सबका नेक है —

मिटा दो फ़ासले, बढ़ाओ प्यार। 🤝


गर मैं इश्क़ में मर जाऊँ,

तो ग़म नहीं मुझे — 😇

श्मशान हो या कब्रिस्तान,

मैं हल्का होकर जाऊँगा। 🕊️


हम मरकर भी हलके होंगे,

और फिर भी जिम्मेदारी रहेगी — ⚖️


हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई मिलेंगे,

पर गले न लगेंगे। 🤝🚫


इश्क़ करने वालों को 

एक ही कंधे पर उठाएंगे। 💪


मेरी मोहब्बत तो बहाना है —

आना जाना तो लगा ही रहना है।


लौटना तुमको भी है घर को जाना है। 🏡

दुनिया में जो नफरत की बीमारी को

प्रेम में बदलकर तुमको ही फैलाना है। ;


इंसान को इंसान से जो मिलाना है। 🌍❤️


फिर जाना है — लौटकर मेरे पास ही आना है —


यही सिलसिला। 🔄

मुझ में बस एक चिंगारी है —

औकात कम सहीं पर सही इरादा भारी है; 🔥


अगर बगावत करूँ तो आग ही आग होगी —

हर घराने की यही दास्ताँ होगी। 🔥🔥


नहीं चाहता हूंँ की अब

बात आगे बढ़े... 😔💭

वरना कहीं तो अख़बार होगी 🗞️

और कहीं तो राख होगी। 🔥💨


नफ़रत की दीवारों में भी 🧱💔

मोहब्बत की आग होगी। ❤️‍🔥


और सुन परिंदे 🕊️

इश्क़ में 💘

हौसला कायम 💪

उड़ान में रखना, 🕊️✨

हर एक निगाह तुझी पे है ध्यान रखना। 👀💫❤️



जय हिंद, जय भारत! 🇮🇳✨


— यशवंत कुमार गुप्ता


🎯 कविता का उद्देश्य — “इश्क़ की सज़ा”


यह कविता हमें बताती है कि इश्क़ ❤️, जो सबका साझा एहसास है,

किस तरह समाज में भेदभाव और नफ़रत की शिकार बनती है। ⚖️💔


मेरी कविता एक पुकार है इंसानियत के लिए —

धर्म, जाति और फ़र्क़ को भूलकर,

इंसान को इंसान से जोड़ने की। 🤝🌍


यह आवाज़ है उन लोगों का है, जो अपने प्रेम के लिए

दूरियों और दहेजों की दीवारें तोड़ना चाहते हैं। 🕊️🧱


और यह एक वादा भी है —

कि प्रेम की इस आग🔥 को फैलाकर,

हम एक ऐसी दुनिया बनाएंगे, जहाँ प्यार ही सच्चाई होगी। 💞✨


मुख्य बिंदु: 


इश्क़ में भेदभाव और असमानता ⚖️

— चाहे धर्म हो या जाति,

प्रेम करने वालों को समाज अलग-अलग तरीके से ट्रीट करता है।


इंसानियत का संकट 🌍💔

हम एक ही देश में रहते हैं,

फिर भी एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं।

यही दूरी प्रेम की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।



मोहब्बत को क्रांति का ज़रिया बनाना 🔥❤️

— ‘प्रेम की बीमारी’ फैलाकर,

नफ़रत और बंटवारे को खत्म करना है।



सामाजिक ज़िम्मेदारी और साहस ✊🛡️

इश्क़ करने वालों को न केवल सहना पड़ता है,

बल्कि अन्याय के खिलाफ लड़ना भी पड़ता है।

🌿 अगर यह कविता आपके मन को छू गई

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📘 An English version of this poem is provided below for better understanding and collaboration.🌍


💞 Court of Love & The Disease of Affection 💞


Theme: One breath — yet why so many differences?


By: Yashwant Kumar Gupta ✍️



💔 Prologue — “The Punishment of Love”

Those who love 💖
are often punished —
sometimes by society ⚖️,
sometimes by their own 💔.

Love sees no religion,
no caste,
yet somehow it becomes a crime.

My poem is a voice 🗣️
for the hearts that burn in love,
while the world keeps spreading hate.

Let’s infect the world
with the disease of love 💞 —
and reconnect human to human. 🤝

Come, let’s feel together —
“The Court of Love and The Disease of Affection.” 💓




💖 The Punishment of Love 💖


Those who dare to love 🚶‍♂️
are often killed for it. 💔

Why such injustice? ⚖️

Some see a flower 🌸
as a thorn and
destroy it from its roots. 🥀

How can a human
become so heartless? 😔

We all breathe the same air —
one breath, one heartbeat. 💓

The lover and the killer
are both human —
the one who dies 💀
and the one who kills ⚔️
share the same soul.

Yet, there are countless judges,
handing endless punishments. ❓

Why such deep discrimination? 🤷‍♂️



We call even our enemies “jaan” — 💞
the same word that means life.

This soil of love we call —
Hindustan. 🇮🇳

If love itself divides us,
then erase that divide. ✋

Faith is pure in every heart —
let’s erase the distances,
and spread love again. 🤝



If I die for love,
I won’t regret it. 😇
Cremation ground or graveyard,
I’ll go lighter than air. 🕊️

Even in death, our duty remains — ⚖️
Hindu, Muslim, Sikh, Christian —
we live together,
but still don’t embrace each other. 🤝🚫

Those who love
will still be carried
on the same shoulder. 💪



My love is just a reason —
coming and going is life’s nature.

You’ll return home someday 🏡
and carry forward this flame —

Turn this disease of hate
into the fire of love. 🔥❤️

Unite human to human again 🌍💖
and come back —
to this eternal cycle 🔄


Inside me burns a small spark —
my strength may be small,
but my intentions are mighty. 🔥


If I rebel —
there will be fire everywhere. 🔥🔥
Every household will have the same tale.

I wish it doesn’t go that far… 😔💭
Otherwise, one will become a headline 🗞️
and another, just ashes. 💨

Even behind walls of hate 🧱💔
love will still burn. ❤️‍🔥


And listen, little bird 🕊️ —
keep courage alive 💪
in your flight. ✨

Every eye is watching you 👀💫
Fly strong,
fly for love. 💘

Jai Hind, Jai Bharat! 🇮🇳✨


Kumar ✍️Gupta


🎯 Purpose — “The Punishment of Love”


This poem reminds us that love,
the most human feeling,
still suffers under discrimination and hate. ⚖️💔

It’s a call for humanity —
to forget religion, caste, and divide,
and connect human hearts again. 🤝🌍

It’s a voice for those
who dare to break walls of dowry, distance, and hate. 🧱💞

And it’s a promise —
to spread this fire of love
until the world becomes one,
where love is the only truth. 💞✨



Main Themes:


❤️ Discrimination in Love
— Society treats lovers differently across faiths & castes.

💔 Humanity in Crisis
— We live in the same land but drift apart in hearts.

🔥 Love as Revolution
— Spread love as a contagious fire to end hate & division.

✊ Courage & Responsibility
— Lovers not only suffer but also fight against injustice.


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