विषय:-आँखों का नूर, दिल का कोहिनूर!
परिचय: ✍️ मैं हूँ कुमार गुप्ता —
मैं ऐसा कवि हूँ,
जो शब्दों में वो सच्चाइयाँ उकेरता है
जिन्हें लोग ज़िंदगी भर कह नहीं पाते… 💛
मेरी रचनाएँ उन ख़ामोश दिलों की आवाज़ हैं,
जो बोलते कम हैं,
पर बहुत ज़्यादा महसूस करते हैं। 🤫✨
मैं उन भावों को लिखता हूँ
जो रात की तन्हाई में जागते हैं,
और सपनों को छू कर
दिन के उजालों में दब जाते हैं। 🌙
अगर आप भी उन दौर से गुजरे हो या,
कभी गलत समझे गए हो—
तो मेरी कलम
आप तक ज़रूर पहुँचेगी। ❤️✨
— कुमार गुप्ता
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“आँखों का नूर — एक अधूरी मोहब्बत✨दिल के नूर और दर्द की यह कहानी उन लोगों की आवाज़ है |
आइए महसूस करें —
✨ “आँखों का नूर — एक अधूरी मोहब्बत” ✨
आँखों का नूर 👁️✨
दिल में बसी कोहिनूर 💎
लगाए काजल तो
दुनिया देखे दूर-दूर 👀
वो जब भी मेरी तरफ देखे तो—
मेरा तमाशा बने भरपूर 🎭
यहाँ कौन राज़ खोले मोहब्बत का ❤️🔥
सब छुपाए बैठे हैं…
हम तो लुटे-लुटाए बिना ही
बन बैठे हैं मशहूर 🌟।
डोली सजी और निकल पड़ी 🚪👰
थी वो इतनी मगरूर…
आँखें बंद की तो उसने कहा—
“ज़रूरत पड़ी तो मिलेंगे ज़रूर…” 🤍
दिल में बसी कोहिनूर 💎
छोड़ जा रही अपनी नूर 🌙।
मैं किताबों में उसी को ढूँढता रहा 📚
सर्द की ख़ामोशी में
पागलों की तरह लिखता रहा ✍️
पलकों पे लाकर आँसू…
दुनिया के सामने
मुस्कुराकर हँसता रहा 🙂💧।
क्योंकि मैं भी कभी
उसकी ख़्वाहिश का हिस्सा रहा 💞।
एक रोज़ सपनों में आकर बोली—
“तू था ही इतना मगरूर…” 🌒
बेवफ़ा हम हो गए तुझसे दूर…
आँखें खोली तो मैंने बोला—
“मैं ठहरा खान का कोयला 🖤
तेरी यादों की तपन में आज भी
आग की तरह जलता रहा 🔥।
तू आज का सितारा है ⭐
मेरे अँधेरों में आज भी
तेरी ही नूर पलता रहा ✨”
हक़ीक़त में देखो तो—
मेरा हाथ आज भी जलता रहा 🔥✋
मुझे नहीं होना था मशहूर…
हो गए हम तुमसे दूर 🌫️
बनाए रखना अपनी नूर 🌟
आँखों में तेरी जो
मैं काजल सा ठहर के रह गया।
कैसे करे कोई दूर…
तू ही मेरी वफ़ा है,
और मैं बन बैठा मजबूर।
तेरी आँखों का —
मैं ही हूँ वो नूर।✨
— कुमार गुप्ता
✨ कविता का उद्देश्य:— ✨
हमारी कविता का उद्देश्य है:- अकेलेपन 💔, अधूरी मोहब्बत ❤️🔥 और भीतर की खामोशी 🤫 को आवाज़ देना।
ये कविता हर उस इंसान के दर्द को ब्यां करती है-
जो बाहर से मुस्कुराते है 🙂
पर अंदर ही अंदर यादों की आग में जलते रहते है 🔥।
कविता बताती है कि—
हर शांत चेहरा 😶
अपने अंदर एक गहरा तूफ़ान को समेटे बैठे होता है 🌪️।
हमारी रचना उन लोगों के लिए है
जो प्यार में बिछड़ गए 💛, या
कभी गलत समझे गए 😔,
जहाँ अपनी तन्हाई को ही अपनी दुनिया बना चुके हैं 🌙✨।
कविता का मुख्य बिंदु:
1. अधूरी मोहब्बत का दर्द 💔✨:
हमारी कविता उस इंसान की दास्ताँ सुनाती है,
जिसने प्यार तो किया… पर साथ नहीं मिला।
2. खामोशी में छुपा तूफ़ान 🤫🌪️:
वह बाहर से शांत दिखता है,
लेकिन अंदर यादों और तन्हाई की आग जलती रहती है।
3. खुद को कमतर समझने का एहसास 🖤⭐
कविता में कवि खुद को “कोयला” मानता है
और उसे “सितारा”—यानी प्यार ने उसका आत्मविश्वास भी तोड़ा है।
4. सचाई की चुभती स्वीकारोक्ति 🎭🔥
उसे समझ आता है कि वह मशहूर नहीं होना चाहता था,
बस सच्ची मोहब्बत चाहता था—
पर किस्मत ने दूरी ही लिखी।
👇👇📚✨
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