उप शिर्षक: इंतज़ार की अधूरी कहानी ❤️
🌹 परिचय :💔 यह कविता उस दर्द को दर्शाती है
जब कोई जाते हुए भी पीछे मुड़कर नहीं देखता।
❤️ विरह की पीड़ा और अधूरी चाहत का यह भाव,
दिल को गहराई तक छू जाता है।
🌸 यह रचना प्रेम, तन्हाई और यादों का सजीव चित्रण है।
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💔 वो चला गया, लेकिन उसकी यादें आज भी दिल में ज़िंदा हैं। कुमार✍️ गुप्ता |
आईए महसूस करें कविता
💔 वो जाते हुए भी पीछे मुड़कर नहीं देखा,
❤️ दिल को तन्हाई का तोहफ़ा दे गया।
💔 उम्मीदें टूटीं, ख्वाब बिखर गए,
❤️ मगर आँखों में उसका चेहरा रह गया।
💔 चाहा था कि एक बार ठहर जाए,
❤️ मगर कदमों ने दूरी का फासला तय कर लिया।
💔 हवाओं ने भी सवाल किया,
❤️ वो जाते हुए क्यों नहीं ठहरा।
💔 हर राह पर उसकी आहट ढूँढी,
❤️ मगर सन्नाटा ही गवाही बना।
💔 शोर में भी आवाज़ लगाई ,
❤️ मगर जवाब भी धीरे से आई।
💔 दिल ने पुकारा कई बार,
❤️ मगर उसने सुनना ही नहीं चाहा।
💔 जाते-जाते वो खामोशी छोड़ गया,
❤️ और उस खामोशी ने मुझे तोड़ दिया।
💔 चाँदनी रातें भी गवाही बनीं,
❤️ वो पीछे मुड़कर नहीं देखा तो।
बादल ही तबाही बनी।
💔 मोहब्बत का वादा अधूरा रह गया,
❤️धरती नीचे और आसमां ऊपर ही ठहर गया।
❤️ और विरह ही किस्मत बनी ।
लिखा मैं और कोई पंक्षी लेकर उड़ गया।
💔 वो जाते हुए भी पीछे मुड़कर नहीं देखा,
❤️ यही दर्द मेरी कविता का राज़ बन गया।
🌿 समापन
💔 कुछ लोग ज़िंदगी से चले जाते हैं,
मगर उनकी यादें कभी नहीं जातीं।
❤️ हम उन्हें भूलने की कोशिश करते हैं,
लेकिन हर गुज़रते दिन के साथ
उनका एहसास और गहरा होता जाता है।
🥀 शायद मोहब्बत का सबसे बड़ा दर्द यही है,
कि जिसे हम रोक नहीं पाए,
उसी का इंतज़ार उम्रभर करते रह जाते हैं।
🌙 वो जाते हुए भी पीछे मुड़कर नहीं देखा,
मगर उनकी यादों ने
हर मोड़ पर मेरा हाथ थामे रखा।
💔 अब वो मेरी ज़िंदगी में नहीं,
लेकिन मेरी कविताओं में हमेशा ज़िंदा रहेंगे।
✍️ कुमार गुप्ता
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