मध्यांतर – भाग 15 : मध्यांतर (अंतिम भाग)
🌿 आइए महसूस करें...
आरव की उस अंतिम यात्रा को, जहाँ प्रेम, विरह, संघर्ष, समय और दादाजी की सीख मिलकर जीवन का वास्तविक अर्थ उजागर करती है।
🌿 कवि की अनुभूति
आरंभ जन्म से होता है,
अंत मृत्यु पर ठहरता है।
इन दोनों के बीच जो सफर हम जीते हैं,
वही हमारा 'मध्यांतर' है।
![]() |
📖 हर यात्रा का अंत केवल एक समापन नहीं होता, बल्कि उन अनुभवों का सार होता है जो जीवन को अर्थ देते हैं। 'मध्यांतर – |
बरसों बीत चुके थे।
समय ने अपनी गति कभी नहीं रोकी।
बचपन की गलियाँ अब स्मृतियों में थीं।
कॉलेज की हँसी अब कहानियों में थी।
बरगद का वह पेड़ शायद अब भी वहीं खड़ा था, लेकिन उसके नीचे बैठने वाले लोग बदल चुके थे।
जीवन आगे बढ़ चुका था।
और आरव भी।
एक शाम वह अपने पुराने घर के आँगन में बैठा था।
ठीक उसी जगह, जहाँ कभी दादाजी बैठा करते थे।
आकाश में बादल थे।
हवा में वही पुरानी मिट्टी की खुशबू थी।
और दूर कहीं बारिश हो रही थी।
उसने अपनी डायरी खोली।
पहले पन्ने पर वही कविता लिखी थी, जहाँ से उसकी यात्रा शुरू हुई थी।
वह धीमे-धीमे पढ़ने लगा—
आरंभ की शुरुआत जन्म से होता है...
और अचानक उसकी आँखों के सामने पूरा जीवन चलचित्र की तरह घूमने लगा।
उसे अपना बचपन दिखाई दिया।
कागज़ की नावें।
माँ की आवाज़।
स्कूल का पहला दिन।
पहली हार।
पहला सपना।
फिर उसे नंदिनी याद आई।
पहली मुलाक़ात।
बरसाती शाम।
पहला इकरार।
दूरियों का मौसम।
पुनर्मिलन।
और संघर्षों के बीच जीवित रहा विश्वास।
फिर दादाजी दिखाई दिए।
उनकी मुस्कान।
उनकी बातें।
उनकी सीख।
और वह अंतिम बरसात जब उन्होंने कहा था—
जीवन जीतने के लिए नहीं,
समझने के लिए होता है।
आरव ने डायरी बंद कर दी।
अब उसे समझ आने लगा था कि दादाजी क्या कहना चाहते थे।
जीवन में उसने बहुत कुछ पाया था।
कुछ सपने पूरे हुए।
कुछ अधूरे रह गए।
कुछ लोग मिले।
कुछ बिछड़ गए।
कुछ रिश्ते समय के साथ बदल गए।
और कुछ समय से भी मजबूत निकले।
लेकिन आज जब वह पीछे मुड़कर देखता था, तो उसे एहसास होता था कि जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि सफलता नहीं थी।
सबसे बड़ी उपलब्धि वे लोग थे जिन्होंने उसके जीवन को अर्थ दिया।
उसने आसमान की ओर देखा।
हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी।
एक बूंद उसकी हथेली पर आकर ठहर गई।
उसे लगा जैसे समय स्वयं उससे बात कर रहा हो।
उसने धीरे से कहा—
दादाजी, अब समझ गया हूँ।
जन्म और मृत्यु केवल दो घटनाएँ हैं।
असली कहानी उनके बीच लिखी जाती है।
वही कहानी जिसमें प्रेम होता है।
विरह होता है।
मित्रता होती है।
परिवार होता है।
संघर्ष होता है।
हार होती है।
जीत होती है।
और सबसे बढ़कर...
इंसान होना होता है।
बारिश अब तेज़ होने लगी थी।
लेकिन इस बार उसमें उदासी नहीं थी।
उसमें शांति थी।
स्वीकार था।
समझ थी।
आरव ने अपनी डायरी के अंतिम पन्ने पर लिखा—
जीवन ने मुझे सिखाया कि
मंज़िल मृत्यु नहीं है।
मंज़िल तो वह इंसान बनना है
जिसे अपने सफ़र पर पछतावा न हो।
उसने कुछ क्षण सोचकर आखिरी पंक्ति जोड़ी—
हम सब यात्री हैं।
कोई पहले उतर जाता है,
कोई बाद में।
लेकिन यात्रा का सौंदर्य इसी में है कि
कुछ दूरी हम साथ चलते हैं।
बारिश थमने लगी।
आसमान के बादलों के बीच से हल्की चाँदनी उतर आई।
आँगन में शांति फैल गई।
आरव मुस्कुराया।
शायद पहली बार उसे किसी उत्तर की तलाश नहीं थी।
क्योंकि अब वह समझ चुका था—
जीवन का अर्थ खोजा नहीं जाता,
बल्कि जिया जाता है।
![]() |
'मध्यांतर' का अंतिम अध्याय प्रेम, विरह, विश्वास, संस्कार और जीवन-दर्शन की उस यात्रा को पूर्ण करता है, जहाँ हर अनुभव एक नई सीख और हर स्मृति एक नई रोशनी बन जाती है। |
🌧️ उपसंहार
आरंभ जन्म था।
अंत मृत्यु होगी।
पर इन दोनों के बीच जो प्रेम, संघर्ष, स्मृतियाँ, आँसू, मुस्कान और रिश्ते हमने जिए...
वही हमारा "मध्यांतर" है।
और शायद...
यही जीवन की सबसे सुंदर कविता है।
🌺 समाप्त 🌺
— यशवंत कुमार गुप्ता
मध्यांतर : जन्म और मृत्यु के बीच की कहानी 🌧️📖
मध्यांतर भाग (15/15)
मध्यांतर का पिछला और विरासत की प्रथम भाग का हिन्दी साहित्य पढ़े। 👉
मध्यांतर भाग–14 : बरसात की वापसी | यादें, जीवन की सीख और भावनात्मक हिंदी उपन्यास
🌳 विरासत —
आईए कुछ और चुनिंदा कविता पढ़े...
🐧• शब्दों में बसे एहसासों का खूबसूरत सफ़र🕊️।
👉 भावनाओं से सजी एक अनकही दुनिया...... कुमार✍️ गुप्ता
💬 अपना प्यार और सुझाव ज़रूर बताएं!
💌 Drop a comment below — your words are precious to us. ✨💬



0 टिप्पणियाँ
✍️ अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर लिखें!
आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए मूल्यवान है।